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kanya utthan yojana : 31 कॉलेज की 4242 छात्राओं को मिलेंगे 50-50 हजार, जानें आप कब से कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन

kanya utthan yojana: बिहार मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत जय प्रकाश विश्वविद्यालय से संबद्ध छपरा सिवान और गोपालगंज के 31 कॉलेजों की 4242 छात्राओं का नाम पोर्टल में अपलोड हो पाया है। केवल इन्ही छात्राओं को कन्या उत्थान योजना का लाभ मिलेगा। अब 2 अप्रैल से फिर खुलेगा पोर्टल।

जयप्रकाश विश्वविद्यालय के छपरा, सिवान और गोपालगंज से संबद्ध महाविद्यालय में पढ़ने वाली केवल 4242 छात्राओं का नाम पोर्टल में अपलोड हो पाया है। केवल इन्ही छात्राओं को कन्या उत्थान योजना का लाभ मिलेगा।

शिक्षा विभाग ने पोर्टल का बंद कर दिया है, जिस कारण कन्या उत्थान योजना के नए पोर्टल पर अब कोई और नाम नहीं जुड़ सकेगा। इसके साथ ही सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि जिन छात्राओं के रिजल्ट या फिर अन्य कारण से डॉक्यूमेंट अपलोड नहीं हो सके हैं, वे हर हाल में 31 मार्च से पहले अपने डॉक्यूमेंट अपलोड कर दें।

अभी तक सत्र 2017-20 की छात्राएं इससे लाभान्वित हो सकी हैं, जिन्हें 50-50 हजार रुपये मिलेंगे। हालांकि, सत्र 2018-21 के बीच पढ़ाई खत्म करने वाली छात्राओं को योजना का लाभ नहीं मिला है। फिलहाल, 1 अप्रैल 2021 से 31 अक्टूबर 2022 के बीच ग्रेजुएशन की परीक्षा पास करने वाली छात्राओं के नाम कन्या उत्थान योजना के तहत मेधा सॉफ्ट पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं। ​

2 अप्रैल के बाद फिर खुलेगा पोर्टल

कन्या उत्थान योजना के दूसरे चरण के तहत रजिस्ट्रेशन करने के लिए 2 अप्रैल के बाद फिर से पोर्टल खुलेगा, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। विश्वविद्यालय सूत्रों ने बताया कि मुख्यालय के अधिकारी पोर्टल बंद करने की जानकारी दी गई है। जयप्रकाश विश्वविद्यालय में स्नातक सत्र 2018-21 में उत्तीर्ण करीब साढ़े चार हजार छात्राओं का नाम अब तक अपलोड किया जा चुका है। ये छात्राएं पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करते हुए अपना डॉक्यूमेंट अपलोड करेंगी। पहले चरण में इन छात्राओं को कन्या उत्थान योजना के तहत 50 हजार रुपये का भुगतान इसी महीने किए जाने की उम्मीद है।

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रोज बढ़ रहा था लाभार्थियों का आंकड़ा

कन्या उत्थान योजना के नए पोर्टल पर आवेदन के लिए 31 मार्च तक का समय दिया गया है। वहीं इसी वित्तीय वर्ष में भुगतान करने की भी योजना है। पोर्टल पर रोज लाभार्थियों की संख्या बढ़ रही थी। छात्राओं का पेंडिंग रिजल्ट सुधर रहा था, उनका नाम पोर्टल पर जुड़ रहा था। यह काम सभी विश्वविद्यालयों में हो रहा था। इसके चलते हर रोज संख्या बढ़ रही थी। इसको देखते हुए ही विभाग ने पोर्टल बंद कर दिया। अब केवल जिन छात्राओं का नाम अपलोड है, वे ही अपना रजिस्ट्रेशन कर सकती है।

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